• ब्रहस्पतिवार, अक्टूबर  17, 2019
:: उच्चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा शिक्षक और शिक्षण पर पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन की योजना के अंतर्गत शिक्षक शिक्षण केन्द्र के लिए विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग को स्वीकृति प्रदान की है |
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नवीन सूचनाएँ
2019-20 के दौरान नियमित तथा अंशकालिक पाठ्यक्रमों के नवंबर-दिसंबर सेमेस्टर परीक्षा के संबंध में सूचना   
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आई.सी.एच.आर परियोजना के तहत अनुबंध के आधार पर 01 अनुसंधान सहायक की रिक्ति के लिए वॉक इन इंटरव्यू के संबंध में शुद्धिपत्र   
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आई.सी.एच.आर परियोजना के तहत अनुबंध के आधार पर 01 अनुसंधान सहायक की रिक्ति के लिए वॉक इन इंटरव्यू के संबंध में सूचना   
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समयावधि 01.09.2019 से 30.09.2019 तक : विद्यावारिधि(पीएच.डी) डिग्री से सम्मानित किया जाने वाले छात्रों की सूची के बारे में अधिसूचना
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विद्यापीठ के समिति कक्ष में प्रोजेक्टर लगाने के लिए कोटेशन
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शास्त्री और आचार्य पाठ्यक्रमो के छात्रों के लिए पूरक परीक्षा के परिणामों के संबंध में अधिसूचना
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शोधोपाधि समिति की 20वीं बैठक के संबंध में कार्यालय आदेश
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विद्यापीठवार्ता के संबंध में सूचना (जुलाई-सितम्बर 2019)
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विशिष्टाचार्य के धर्मशास्त्र विषय की मौखिक परीक्षा तिथि
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अनुबंध आधार पर अतिथि संकाय (सिधांत ज्योतिष) के पद के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू के बारे में अधिसूचना
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महामहोपाधयाय डा- मण्डन मिश्र
 
 
 
सामाजिक सेवायें
 

डा. मिश्र ने महाराजा संस्कृत कालेज जयपुर में अध्यापक के रूप में सेवा कार्य प्रारम्भ किया तथा वहीं व्याख्याता और प्राफेसर के रूप में पदोन्नत हुये। सन् 1947 ई. में बड़ी संख्या में पुरूषार्थियों के जयपुर में आने पर आपने उनको स्थानीय जनता और व्यवसाय में जमाने की दृष्टि से भारतीय साहित्य विद्यालय की स्थापना की, जिसके माध्यम से अनेक रात्रि शालायें चलाकर 20 हजार से अधिक सिन्धी भाई-बहिनों को हिन्दी सिखाने का कार्य किया। यह डा. मिश्र द्वारा समाज सेवा का श्रीगणेश था। दिल्ली जैसे महानगर में आवासीय गृह समूह के रूप में संस्कृत भवन सोसायटी का निर्माण आप ही के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ जो कि सामुदायिक समाज सेवा का प्रत्यक्ष निदर्शन है। राजस्थान भारत सेवक समाज के सचिव संयुक्त संयोजक के रूप में आपने प्रदेश के युवकों में नई जागृति पैदा की और उसी के माध्यम से भारत सेवक समाज के अध्यक्ष पं. जवाहर लाल नेहरू तथा प्रदेश के प्रतिष्ठित नेताओं के सम्पर्क में आये। भारत साधु समाज की स्थापना के उद्देष्य से श्री गुलजारी लाल नन्दा एवं श्री माणिक्य लाल वर्मा के नेतृत्व में सन् 1956 में नाथद्वारा में अखिल भारत साधु सम्मेलन तथा सन् 1959 ई. में भीलवाड़ा (राजस्थान) में अखिल भारत सेवक समाज का अधिवेशन पं. जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में आयोजित किया। इन दोनों आयोजनों से डा. मिश्र के रूप में एक ऐसा व्यक्तित्व उभर कर सामने आया जो संस्कृत में विद्वत्ता के साथ साथ समाज सेवा और महनीय नेताओं के योग से लेखन भाषण संघटन तथा प्रशासन कौशल के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी एक अत्यन्त सुदृढ़ आधार स्तम्भ लेकर विकसित हुआ। डा. मिश्र उस समय राजस्थान संस्कृत साहित्य सम्मेलन के भी मन्त्री थे उनके प्रयास और श्री लक्ष्मीलाल जोशी जैसे मनीषियों के सहयोग से यशस्वी नेता श्री मोहनलाल सुखाडिया के मुख्यमंत्रित्व में राजस्थान में संस्कृत के अलग निदेशालय की स्थापना हुई और राजस्थान विश्वविद्यालय में प्राच्य विद्या संकाय प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया। आप द्वारा स्थापित अनेक विद्यालय वर्तमान में उच्च स्तरीय राजकीय महाविद्यालयों के रूप में प्रतिष्ठित हैं। पंजाब समस्या के प्रारम्भ में लोकनायक श्रीमती इन्दिरा गांधी के संकेत पर डा. मिश्र ने एक राष्ट्रीय बुद्धिजीवी सम्मेलन का आयोजन किया जिसका उद्घाटन श्रीमती गान्धी ने किया और वे सम्मेलन में 3 घण्टे उपस्थित रही।

 
 
 
 
  2006 सर्वाधिकार सुरक्षित संस्कृत विद्यापीठ , नई दिल्ली , सम्मति  :वेबमास्टर डिस्क्लेमर         अच्छा प्रदर्शन : 800X600
कम्प्यूटर केन्द्र द्वारा अनुरक्षित-एस एल बी एस आर एस वी , नई दिल्ली, ११००१६