• मंगलवार, नवम्बर 19, 2019
:: उच्चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा शिक्षक और शिक्षण पर पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन की योजना के अंतर्गत शिक्षक शिक्षण केन्द्र के लिए विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग को स्वीकृति प्रदान की है |
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दीक्षान्त समारोह

 
विशेष दीक्षांत समारोह
 

महामहिम डॉ0 शंकरदयाल शर्मा को ‘वाचस्पति’ मानद उपाधि समर्पित की गई । समारोह में भारत सरकार के शिक्षामंत्री, उच्च पदाधिकारीगण देश-विदेश के विशिष्ट संस्कृत विद्वान्, संस्तानुरागी एवं विभिन्न संस्कृत विश्वविद्यालयों के तथा संस्कृत की संस्थाओं के पदाधिकारी एवं विशिष्ट व्यक्ति उपस्थित थे । विद्यापीठ के कुलपति डॉ. मण्डन मिश्र ने राष्टपति महोदय के सम्मान में प्रशस्ति पाठ किया । महामहिम राष्टपति महोदय को करतल ध्वनी के साथ वाचस्पति उपाधि प्रदान की । राष्टपति महोदय ने अपने भाषण में इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की, कि उन्हें विद्यापीठ द्वारा सम्मानित किया जा रहा है । राष्टपति महोदय ने संस्कृत के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाओं के लिये विद्यापीठ की सराहना की ।

 
 

 
प्रथम दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का प्रथम दीक्षान्त समारोह 15 फरवरी, 1994 को राष्टपति महोदय डॉ0 शंकर दयाल शर्मा जी के मुख्यातिथित्व में सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर श्री गोड़ा सुब्रह्मण्यम् शास्त्री मद्रास एवं पण्डित विश्वनाथ शास्त्री दातार वाराणसी को महामहोपायाय, पण्डित करुणापति त्रिपाठी वाराणसी, राजवैद्य बृहस्पतिदेव त्रिगुणा नई दिल्ली, डॉ0 ऑस्कर बोटो इटली, डॉ0 छाजुओ अजूमा जापान को वाचस्पति की मानद उपाधि प्रदान की गई । दीक्षान्त समारोह में 45 विद्यावारिधि, 7 शिक्षाचार्य, 177 आचार्य, 577 शिक्षाशास्त्री, 179 शास्त्री कुल 985 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गई ।

 
 

 
द्वितिय दीक्षांत समारोह
 

11 जनवरी, 1996 को द्वितीय दीक्षान्त समारेाह में सुप्रसिद्ध विद्वान् डॅ0 कर्ण सिंह ने दीक्षान्त भाषण दिया । इस अवसर पर डॉ0 कर्ण सिंह दिल्ली, श्रीधर वासुदेव सोहनी पुणे, वैद्य श्री नानकचन्द्र शर्मा दिल्ली को वाचस्पति तथा प्रो0 अनन्त लाल ठाकुर कलकाा, पं0 रामप्रसाद त्रिपाठी वाराणसी, श्री टी.एस. श्रीनिवास शास्त्री पुणे को महामहोपायाय उपाधि प्रदान की गई । डॉ0 कर्ण सिंह ने अपने दीक्षान्त भाषण में जनजीवन में संस्कृत की उपादेयता और संस्कृत के उज्ज्वल भविष्य की चर्चा की । इस अवसर पर एक सप्ताह का एक सारस्वत कार्यम भी आयोजित किया गया, जिसके अन्तर्गत शारदीय ज्ञान महोत्सव एवं म0म0 पं0 पट्टाभिरामशास्त्री व्याख्यानमाला, युवसमारेाह, नाट्य समारोह आदि आयोजित किए गये । विद्यापीठ के कुलपति प्रो0 वाचस्पति उपायाय ने कार्यमों की प्रस्तुति एवं संयोजन को एक नया आयाम एवं दीक्षान्त समारोह को एक नई दिशा दी । दीक्षान्त समारोह में विद्यावारिधि के 23, शिक्षाचार्य के 7, आचार्य के 94, शिक्षाशास्त्री के 337 एवं शास्त्री के 46 कुल 507 छात्रों को उपाधि प्रदान की गई ।

 
 

 
तृतीय दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का तृतीय दीक्षान्त समारोह 5 से 11 जनवरी, 1999 तक आयोजित किया गया। इस अवसर पर सप्तपर्णी कार्यम के अन्तर्गत सारस्वत इष्टि एवं पौरोहित्य प्रशिक्षण प्रगत अययन के अन्तर्गत द्वितीय शिविर का शुभारम्भ, शारदीय ज्ञान महोत्सव व्याख्यानमाला, म0म0 पं0 श्री पट्टाभिरामशास्त्री व्याख्यानमाला, युवसमारोह, काव्य-गोष्ठी ;संस्कृत, प्रात एवं हिन्दीद्ध एवं नाट्य समारोह आयोजित किए गए । मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्राी डॉ0 मुरलीमनोहर जोशी ने दिया । इस अवसर पर पुरस्कार वितरण डॉ0 लक्ष्मीमल्ल सिंघवी पूर्व उच्चायुक्त ब्रिटेन ने किया । कुलाधिपति द्वारा प्रो0 गोविन्द चन्द्र पाण्डेय उ0प्र0, प्रो0 हेरम्ब चटर्जी पं0 बं0, प्रो0 श्रीरामचन्द्रडू आन्ध््रप्रदेश, डॉ0 मण्डन मिश्र राजस्थान, डॉ0 भुवनचन्द्र जोशी उ0प्र0 को महामहोपायाय तथा श्री पी.सी. देवसिया केरल, डॉ0 लक्ष्मीमल्ल सिंघवी दिल्ली वैद्य श्री देवेन्द्र त्रिगुणा दिल्ली, को वाचस्पति की मानद उपाधियाँ प्रदान की गईं। इस अवसर पर 27 विद्यावारिधि, 17 शिक्षाचार्य, 163 आचार्य, 443 शिक्षाशास्त्री तथा 137 शास्त्री इस प्रकार कुल 787 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गई ।

 
 

 
चतुर्थ दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का चतुर्थ दीक्षान्त समारोह 11 फरवरी, 2000 को आयोजित किया गया । 5-11 फरवरी, 2000 तक आयोजित सप्तपर्णी कार्यम के अन्तर्गत सारस्वत इष्टि एवं ज्योतिष व्याख्यानमाला, द्वितीय शिविर का शुभारम्भ शारदीय ज्ञान महोत्सव व्याख्यानमाल, ज्योतिष पुनश्चर्या पाठ्यम-शुभारम्भ, म0म0पं0 श्री पट्टाभिरामशास्त्री स्मारक व्याख्यानमाला, संस्त वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित विशिष्ट व्याख्यानमाल, युवसमारोह, काव्य-गोष्ठी एवं नाट्य समारोह आयोजित किए गए । मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण महामहोपायाय पद्म श्री डॉ0 मण्डनमिश्र ने दिया । इस अवसर पर पुरस्कार वितरण श्री महाराजष्ण काव, शिक्षा सचिव, मानव संसाधन विकास मन्त्रालय ने किया । कुलाधिपति द्वारा श्री स्वामी रामभद्राचार्य उ0प्र0, पण्डितरत्नम् के.पी. नारायण पिषारडि केरल, पं0 कल्याणदा शर्मा राजस्थान को महामहोपायाय तथा श्री त्रिलोकीनाथ चतुर्वेदी उ0प्र0, प्रो0 द्रावका मेत्सिक, ोशिया यूरोप को वाचस्पति की मानद उपाध्यिाँ प्रदान की गईं । इस अवसर पर 11 विद्यावारिधि, 11 शिक्षाचार्य, 74 आचार्य, 133 शिक्षाशास्त्री तथा 49 शास्त्री, इस प्रकार कुल 278 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गई ।

 
 

 
पाँचवां दीक्षांत समारोह
 

पंचम दीक्षान्त समारोह 28 फरवरी, 2001 को आयोजित किया गया । इस अवसर पर युवसमारोह तथा काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया । मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण महामहोपाध्याय पद्मभूषण श्री डॉ0 विद्यानिवास मिश्र ने दिया । इस अवसर पर पुरस्कार वितरण केन्द्रीय संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष--माननीय न्यायमूर्ति श्री रंगनाथ मिश्र ने किया । संस्कृत शिक्षा मंत्री (राजस्थान) श्रीमती कमला ने स्नातकों को विशेष रूप से संबोधित किया । कुलाधिपति द्वारा प्रो0 विद्यानिवास मिश्र एवं प्रो0 गोविन्द गोपाल मुखोपाध्याय को महामहोपाध्याय तथा श्रीमती कमला एवं वेदवारिधि सी. रामानुजन् को वाचस्पति उपाधि से अलंकृत किया गया । इस अवसर पर 19 विद्यावारिधि, 8 शिक्षाचार्य, 132 आचार्य, 189 शिक्षाशास्त्री तथा 55 शास्त्री, इस प्रकार कुल 403 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गईं ।

 
 

 
छठवां दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का षष्ठ दीक्षान्त समारोह 17 फरवरी, 2002 को आयोजित किया गया । इस अवसर पर युवसमारोह तथा काव्य-गोष्ठ का आयोजन किया गया। मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष डॉ0 हरि गौतम ने दिया । कुलाधिपति द्वारा ब्रह्मर्षि डॉ0 हरिहर कृपालु त्रिपाठी (उत्तर प्रदेश), प्रो0 पी.एन.वी. कुरुप् (केरल) को महामहोपाध्याय तथा प्रो0 हरि गौतम (दिल्ली), प्रो0 रमारंजन मुखर्जी (पश्चिम बंगाल), डॉ0 मिस्लेवयेसिक् (क्रोएशिया) को वाचस्पति उपाधि से अलंकृत किया गया । इस अवसर पर 22 विद्यावारिधि, 11 शिक्षाचार्य, 116 आचार्य, 180 शिक्षाशास्त्री तथा 78 शास्त्री, इस प्रकार कुल 407 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गईं ।

 
 

 
सातवां दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का सप्तम दीक्षान्त समारोह 11 नवम्बर, 2003 को आयोजित किया गया । इस अवसर पर काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया । मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण प्रो0 रमारंजन मुखर्जी, पूर्व कुलाधिपति राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ-तिरुपति ने दिया । माननीय कुलाध्पिति न्यायमूर्ति श्री पी.एन. भगवती द्वारा स्नातकों को विभिन्न उपाधियों के अतिरिक्त आचार्य श्री काशीनाथ मिश्र (बिहार) एवं आचार्य श्री ध्यानेशनारायण चक्रवर्ती (पं0 बंगाल) को महामहोपाध्याय तथा न्यायमूर्ति श्री शंकरनाथ कपूर (दिल्ली) एवं न्यायमूर्ति श्री मार्कण्डेय काटजू (उत्तर प्रदेश) को वाचस्पति उपाधि से अलंकृत किया गया । इस प्रकार 36 विद्यावारिधि, 07 शिक्षाचार्य, 113 आचार्य, 166 शिक्षाशास्त्री तथा 85 शास्त्री, कुल 407 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गईं । इस अवसर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव डॉ0 वेद प्रकाश, सारस्वत अतिथि द्वारा छात्रों को स्वर्णपदक एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं के पुरस्कार प्रदान किये गये । अष्टम दीक्षान्त समारोह विद्यापीठ का अष्टम दीक्षान्त समारोह 12-नवम्बर 2005 को आयोजित किया गया। 6 से 12 नवम्बर 2005 तक सम्पन सप्तवर्णी कार्यक्रम के अन्तर्गत मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया। इस अवसर पर पुरस्कार वितरण प्रो0 राजशेखरन् पिल्लई कार्यवाहकाध्यक्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा किया गया। सिद्धान्त चक्रवर्ती आचार्य विद्यानन्द मुनि जी द्वारा आचार्य किरीट जोशी (नई दिल्ली) एवं आचार्य राजाराम जैन (नोएडा, उत्तर प्रदेश) को वाचस्पति उपाधि से तथा आचार्य केशवराम काशीराम शास्त्री (गुजराज) एवं आचार्य रामयत्नशुक्ल (उत्तर प्रदेश) को महामहोपाध्याय की उपाधि से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर विद्यावारिधि 26, शिक्षाचार्य 21, आचार्य 258, शिक्षा-शास्त्री 340 तथा शास्त्री 155, इसप्रकार कुल 800 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गई।

 
 

 
आठवां दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का अष्टम दीक्षान्त समारोह 12-नवम्बर 2005 को आयोजित किया गया। 6 से 12 नवम्बर 2005 तक सम्पन सप्तवर्णी कार्यक्रम के अन्तर्गत मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया। इस अवसर पर पुरस्कार वितरण प्रो0 राजशेखरन् पिल्लई कार्यवाहकाध्यक्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा किया गया। सिद्धान्त चक्रवर्ती आचार्य विद्यानन्द मुनि जी द्वारा आचार्य किरीट जोशी (नई दिल्ली) एवं आचार्य राजाराम जैन (नोएडा, उत्तर प्रदेश) को वाचस्पति उपाधि से तथा आचार्य केशवराम काशीराम शास्त्री (गुजराज) एवं आचार्य रामयत्नशुक्ल (उत्तर प्रदेश) को महामहोपाध्याय की उपाधि से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर विद्यावारिधि 26, शिक्षाचार्य 21, आचार्य 258, शिक्षा-शास्त्री 340 तथा शास्त्री 155, इसप्रकार कुल 800 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गई।

 
 

 
नौवां दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का नवम दीक्षान्त समारोह दिनांक 10 नवम्बर, 2006 को आयोजित किया गया। दिनांक 6.11.2006 से 10.11.2006 तक पंचामृतम् कार्यक्रम के अन्तर्गत मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण भारतीय दार्शनिक अनुसन्धन परिषद् के पूर्व अध्यक्ष आचार्य किरीट जोशी जी द्वारा दिया गया। इस अवसर पर पुरस्कार वितरण सुप्रसिद्ध संस्कृत कवि प्रो0 श्रीनिवासरथ ने किया कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यापीठ के कुलाधिपति भारत के मुख्य न्यायाधीशचर न्यायमूर्ति श्री पी.एन्. भगवन्ती जी द्वारा किया गया। तथा आचार्य श्रीनिवास रथ (मध्य प्रदेश) आचार्य जार्ज कार्दोना (अमेरिका) को महामहोपाध्याय एवं आचार्य विश्वनाथ बनर्जी (पश्चिम बंगाल) आचार्य मुनीश्वर झा (बिहार) को वाचस्पति की उपाधि से अलघ्कृत किया गया। इस अवसर पर विद्यावारिधि 3, शिक्षाचार्य 31, आचार्य 253, शिक्षाशास्त्री 359 शास्त्री 130 इस प्रकार कुल 776 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गई।

 
 

 
दशवां दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का दशम दीक्षान्त समारोह दिनांक 28.11.2007 को आयोजित किया गया। और एक सप्ताह का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण प्रो0 श्री सत्यव्रत शास्त्राी द्वारा दिया गया। इस अवसर पर प्रो0 सीताराम कृष्णमूर्त्ति शास्त्राी, तमिलनाडू, प्रो0 श्री बी. स्वामी नाथन,तमिलनाडू एवं प्रो0 श्री रामकरण शर्मा, बिहार को महामहोपाध्याय की उपाध् से अलंकृत किया गया। तथा प्रो0 श्री सत्यव्रत शास्त्राी नई दिल्ली एवं डॉ0 इमा पीयावॉनों, इटली को वाचस्पति उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यावारिध् 19, आचार्य 76, शिक्षाशास्त्राी 159, शिक्षाचार्य 22, शास्त्राी 76, एवं पीजी डिप्लोमा वास्तुशास्त्रा 35, इस प्रकार कुल 387 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गई। विद्यापीठ का दशम दीक्षान्त समारोह दिनांक 28.11.2007 को आयोजित किया गया। और एक सप्ताह का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण प्रो0 श्री सत्यव्रत शास्त्राी द्वारा दिया गया। इस अवसर पर प्रो0 सीताराम कृष्णमूर्त्ति शास्त्राी, तमिलनाडू, प्रो0 श्री बी. स्वामी नाथन,तमिलनाडू एवं प्रो0 श्री रामकरण शर्मा, बिहार को महामहोपाध्याय की उपाध् से अलंकृत किया गया। तथा प्रो0 श्री सत्यव्रत शास्त्राी नई दिल्ली एवं डॉ0 इमा पीयावॉनों, इटली को वाचस्पति उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यावारिध् 19, आचार्य 76, शिक्षाशास्त्राी 159, शिक्षाचार्य 22, शास्त्राी 76, एवं पीजी डिप्लोमा वास्तुशास्त्रा 35, इस प्रकार कुल 387 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गई। विद्यापीठ का दशम दीक्षान्त समारोह दिनांक 28.11.2007 को आयोजित किया गया। और एक सप्ताह का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मुख्य समारोह में दीक्षान्त भाषण प्रो0 श्री सत्यव्रत शास्त्राी द्वारा दिया गया। इस अवसर पर प्रो0 सीताराम कृष्णमूर्त्ति शास्त्राी, तमिलनाडू, प्रो0 श्री बी. स्वामी नाथन,तमिलनाडू एवं प्रो0 श्री रामकरण शर्मा, बिहार को महामहोपाध्याय की उपाध् से अलंकृत किया गया। तथा प्रो0 श्री सत्यव्रत शास्त्राी नई दिल्ली एवं डॉ0 इमा पीयावॉनों, इटली को वाचस्पति उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यावारिध् 19, आचार्य 76, शिक्षाशास्त्राी 159, शिक्षाचार्य 22, शास्त्राी 76, एवं पीजी डिप्लोमा वास्तुशास्त्रा 35, इस प्रकार कुल 387 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गई।

 
 

 
ग्यारहवां दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का एकादश दीक्षान्त समारोह दिनांक 6.12.2008 और एक सप्ताह का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यावारिधि 13, शिक्षाचार्य 22, आचार्य 81, शिक्षाशास्त्राी;198द्ध, शास्त्राी 54, स्नातकोत्तरवास्तुशास्त्रोपाध् 12 कुल 380 छात्रो को उपाधियाँ प्रदान की गई।

 
 

 
बारहवां दीक्षांत समारोह
 

विद्यापीठ का द्वादश दीक्षान्त समारोह दिनांक 7.11.2009 को आयोजित किया गया था|

 
 
 
 
 
 
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