• Tuesday,  October 17, 2017
:: The Vidyapeetha has been included in the list of Universities under section 12B of the UGC, Act 1956 :: Department of Higher Education, MHRD has given approval for Teacher Learning Centre under scheme of Pandit Madan Mohan Malviya National Mission on Teachers and Teaching to Department of Education of the Vidyapeetha
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Announcement
Notice regarding meeting of Advisory Committee of Teaching Learning Centre   
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Notice regarding meeting of Academic Council   
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Notice regarding Oral Examination of M.Phil Session 2016-17   
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Notice regarding meeting of Scholarship Committee   
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Notice for owners of illegal vehicles parked in the Vidyapeetha campus
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Admission Notice for Advanced three months certificate course in Sanskrit Patrakarita
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Notification regarding submission of Examination Forms
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Notice regarding Oral Examination of M.Phil Session 2016-17
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Important Notice for Research Students
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Notice regarding holiday on 20/09/2017 on the occasion of Sarv Pitr Amavashya
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Notice regarding Supplementary exam of Shastri and Acharya
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Admission Notice for Bhashapatrkarita (One Year P.G. Diploma)
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Notice regarding Shardiya Vacation
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Notice for students for submission of documents
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Notification regarding Ph.D. Degree
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Vidyapeetha-Kulgeetika

 

यह संस्कृत विद्यापीठ श्रद्धेय श्रीलालबहादुरशास्त्राी जी के द्वारा सरंक्षित है। विद्यापीठ द्वारा अपनी शैशवावस्था में अखिल भारतीय संस्कृत साहित्य सम्मेलन के सहयोग से विविध महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किये गये। इस संस्था ने संस्कृत विद्वत्सम्मेलनों एवं विभिन्न समितियों का संयोजन संस्कृत-ग्रन्थों के सम्पादन और मुद्रण की व्यवस्था तथा संस्कृत-भाषण-प्रतिस्पर्धा एवं कवि-गोष्ठियों के आयोजनों से लोक में पर्याप्त ख्याति अर्जित की है।

 

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मूर्धन्य राजनेता श्री नरहरि विष्णु गाडगिल एवं श्रीबलवन्त नागेश दातार ने विद्यापीठ के प्रवर्तन का पथ प्रशस्त किया। दिल्ली के तत्कालीन उप-राज्यपाल डॉ. आदित्यनाथ झा आदि अधिकारियों ने इस विद्यापीठ को सरकारी अनुदान द्वारा समृद्ध किया। पण्डित-मण्डली से मण्डित डॉ. मण्डन मिश्र आदि विद्वज्जनों के समूह द्वारा इस विद्यापीठ का शैक्षणिक स्तर उन्नत किया गया।

 

श्रीमती इन्दिरा गाँधी जी तथा विभिन्न केन्द्रीय मंत्रियों ने इस विद्यापीठ का सम्पोषण किया। भारत सरकार द्वारा शास्त्री जी के स्मारक रूप में इसके अधिग्रहण करने की घोषणा कर विद्यापीठ का विकास किया। विभिन्न राजनेताओं ने इस विद्यापीठ के कार्यों का यशोगान करके इसे लोक में विशष रूप से प्रतिष्ठित किया।

 

यह विद्यापीठ सभी छात्रों के शिक्षण और संस्कृत शिक्षकों के प्रशिक्षण में सजग है। विद्यापीठ ने अपने मार्ग में आने वाले सैकड़ों विघ्न-बाधाओं का निवारण साहस के साथ किया है। हमें हर्ष है कि इसने शैशवकाल में ही विश्व के कोने-कोने में अपनी कीर्ति पताका फहराई है। ऐसा यह विद्यापीठ श्री लाल बहादुर शास्त्री जी द्वारा संभव हुआ है।

 
 
  
 
 
 
 
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